ग्रहण दोष शांति पूजा
Grahan Dosh Shanti Puja
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को "आत्मा" और चंद्रमा को "मन" कहा गया है। जब जन्म कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु आ जाते हैं, तो सूर्य/चंद्र ग्रहण दोष का निर्माण होता है। यह जातक के जीवन को अंधकारमय बना देता है।
Mahakaleshwar Ujjain



ग्रहण दोष का प्रभाव
जिस प्रकार आसमान में सूर्य या चंद्र ग्रहण लगने पर कुछ समय के लिए घोर अंधकार छा जाता है, उसी प्रकार कुंडली का ग्रहण दोष व्यक्ति के जीवन (करियर, स्वास्थ्य, धन) को ग्रहण लगा देता है।
इस दोष से पीड़ित व्यक्ति चाहे कितना भी प्रतिभाशाली हो, उसकी प्रतिभा दुनिया के सामने नहीं आ पाती। हमेशा एक अज्ञात भय, निराशा और डिप्रेशन उस पर हावी रहता है।
ग्रहण दोष के दो मुख्य प्रकार
ग्रहण दोष दो प्रकार का होता है, और दोनों के प्रभाव अलग होते हैं:
सूर्य ग्रहण दोष (सूर्य + राहु/केतु)
सूर्य पिता, आत्मा और सफलता का कारक है। इसके दूषित होने से व्यक्ति के आत्मविश्वास में भारी कमी आती है। पिता के साथ संबंध खराब होते हैं, पिता को कष्ट होता है, और सरकारी नौकरी या प्रमोशन में हमेशा बाधा आती है।
चंद्र ग्रहण दोष (चंद्र + राहु/केतु)
चंद्रमा मन और माता का कारक है। इसके दूषित होने से व्यक्ति गंभीर डिप्रेशन (Depression) का शिकार हो जाता है। माता का स्वास्थ्य खराब रहता है, व्यक्ति को पानी और ऊंचाई से डर लगता है, और वह हमेशा भ्रम में रहता है।
ग्रहण दोष के लक्षण
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है?
- बहुत मेहनत करने के बाद भी सफलता (Credit) किसी और को मिल जाना।
- हमेशा नेगेटिव विचार आना, आत्महत्या (Suicidal) के विचार आना या घबराहट (Anxiety) होना।
- पिता या माता के स्वास्थ्य का लगातार खराब रहना।
- आंखों (Eyesight) की रोशनी कम होना या हड्डियों में अकारण दर्द रहना।
- समाज में बार-बार अपमानित होना।
शांति अनुष्ठान की विधि
सूर्य और चंद्रमा को राहु/केतु के प्रभाव से मुक्त करने के लिए उज्जैन में विशेष अनुष्ठान किया जाता है:
चरण 1: स्नान और संकल्प
ग्रहण दोष की शांति के लिए तीर्थ स्नान (क्षिप्रा नदी) और विशेष संकल्प लिया जाता है।
चरण 2: नवग्रह और सूर्य/चंद्र पूजन
यज्ञ वेदी पर सूर्य, चंद्र और राहु-केतु की स्थापना कर पंचामृत अभिषेक किया जाता है।
चरण 3: ग्रहण दोष निवारण मंत्र जाप
सूर्य दोष होने पर आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य मंत्रों का जाप, तथा चंद्र दोष होने पर शिव पंचाक्षर और चंद्र मंत्रों का जाप होता है।
चरण 4: हवन और दान
हवन के पश्चात् ग्रहण की छाया से मुक्ति के लिए तुला दान, छाया दान या ग्रहों से संबंधित सामग्री (गेहूं, चावल, काले तिल) का दान किया जाता है।
पूजन के लाभ
- मानसिक अवसाद (Depression) और अज्ञात भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
- करियर और व्यापार में लगा हुआ "ग्रहण" हटता है और तेज तरक्की होती है।
- आत्मविश्वास में भारी वृद्धि होती है और पिता-माता का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।
- समाज में खोया हुआ यश और सम्मान वापस प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या ग्रहण वाले दिन जन्म लेने वालों को ही यह दोष होता है?
नहीं। यदि आपका जन्म किसी भी दिन हुआ हो, लेकिन कुंडली में सूर्य/चंद्र के साथ राहु/केतु बैठे हों, तो यह दोष माना जाता है।
