August 11, 2026 • By Pandit Ji

नाग पंचमी 2026: उज्जैन में पूजा का महत्व, विधि और नागचंद्रेश्वर मंदिर

नाग पंचमी 2026: उज्जैन में पूजा का महत्व, विधि और नागचंद्रेश्वर मंदिर
सावन का पवित्र महीना चल रहा है और हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष स्थान है। यह दिन नाग देवता की पूजा और भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। विशेष रूप से उज्जैन (अवंतिका नगरी) में नाग पंचमी का पर्व एक अद्भुत और दिव्य तरीके से मनाया जाता है।

नाग पंचमी 2026 कब है?

इस वर्ष, नाग पंचमी 17 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में नाग देवता को भगवान शिव के गले का आभूषण और भगवान विष्णु की शय्या (शेषनाग) के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देवता की पूजा सर्प भय से मुक्ति और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना के लिए की जाती है।

उज्जैन में नाग पंचमी का विशेष महत्व

उज्जैन, जो भगवान महाकाल की नगरी है, वहां नाग पंचमी का उत्सव देखने लायक होता है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर इस दिन का प्रमुख आकर्षण होता है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर का महत्व

क्या आप जानते हैं कि उज्जैन का श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां नाग पंचमी के अवसर पर वर्ष में एक बार लगभग 24 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु पट खोले जाते हैं? इस मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है जिसमें शिव और पार्वती दस मुखी सर्प शय्या पर विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की तपस्या यहीं की थी। मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन और पूजा से सर्प भय तथा नाग संबंधी दोषों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।

नाग पंचमी पर कौन-सी पूजा की जाती है?

नाग पंचमी के अवसर पर नाग देवता की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है। इसके अलावा, श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और आवश्यकता के अनुसार रुद्राभिषेक तथा कालसर्प दोष निवारण जैसे अनुष्ठान भी करवाते हैं। यदि आपकी जन्म कुंडली में ग्रहों के कारण कोई बाधा है, तो इस दिन महाकाल रुद्राभिषेक करवाने से शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

नाग पंचमी पूजा विधि और पूजन सामग्री

नाग पंचमी की पूजा पूर्ण सात्विक विधि से की जाती है। परंपरा के अनुसार नाग देवता की प्रतिमा या चित्र का पूजन किया जाता है तथा दूध, पुष्प, अक्षत, हल्दी, कुमकुम और बिल्वपत्र आदि अर्पित किए जाते हैं, और मंत्रों के साथ उनसे परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।

नाग पंचमी पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें: सात्विक आहार लें, भगवान शिव का अभिषेक करें, और नाग देवता के निमित्त दान करें।
क्या न करें: इस दिन भूमि की खुदाई (ploughing) न करें, सुई-धागे का उपयोग न करें, और तामसिक भोजन से पूर्णतः दूर रहें।

नाग पंचमी और कालसर्प दोष का संबंध

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाएं, तो उसे कालसर्प दोष कहते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पंचमी को नाग देवता की पूजा और नाग संबंधी दोषों की शांति के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। कुछ परंपराओं में इस दिन कालसर्प दोष निवारण से जुड़े अनुष्ठान भी किए जाते हैं। यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो उज्जैन में कालसर्प दोष निवारण पूजा के बारे में हमारी विस्तृत जानकारी पढ़ें। इसके साथ ही, जीवन में आयु और आरोग्य के लिए महामृत्युंजय जाप भी अत्यधिक फलदायी सिद्ध होता है।

उज्जैन में नाग पंचमी पूजा क्यों करवाएं?

उज्जैन की पावन भूमि पर क्षिप्रा नदी के तट पर किए गए अनुष्ठान अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं। यहाँ सिद्ध वैदिक ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से पूजा संपन्न की जाती है, जिससे श्रद्धालु अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार पूजा-अनुष्ठान में सम्मिलित हो सकते हैं।

पूजा पाठ उज्जैन से नाग पंचमी पूजा बुक करने का तरीका

आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से सीधे नाग पंचमी के शुभ अवसर पर अनुष्ठान बुक कर सकते हैं। आप उज्जैन आकर या घर बैठे ऑनलाइन संकल्प के माध्यम से पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नागचंद्रेश्वर मंदिर दर्शन का समय क्या है?

नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नाग पंचमी के अवसर पर परंपरानुसार मध्यरात्रि में खोले जाते हैं और लगभग 24 घंटे तक श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति रहती है। 2026 के लिए प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक समय-सारणी को अंतिम माना जाना चाहिए।

क्या मैं घर बैठे कालसर्प पूजा करवा सकता हूँ?

जी हाँ, आप अपना गोत्र और नाम बताकर आचार्य जी के माध्यम से ऑनलाइन संकल्प लेकर पूजा करवा सकते हैं।