August 23, 2026 • By Pandit Ji

जन्माष्टमी 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उज्जैन में महत्व

जन्माष्टमी 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उज्जैन में महत्व
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में गहरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। विशेष रूप से उज्जैन, जहां भगवान कृष्ण ने सांदीपनि मुनि से शिक्षा प्राप्त की थी, वहां यह पर्व अत्यधिक महत्व रखता है।

जन्माष्टमी 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।
मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशीथ काल में की जाती है। उज्जैन के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार प्रमुख समय इस प्रकार हैं:
  • अष्टमी तिथि: 4 सितंबर, रात 2:25 बजे से 5 सितंबर, रात 12:14 बजे तक
  • रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर, रात 12:29 बजे से रात 11:04 बजे तक
  • निशीथ पूजा का समय: 5 सितंबर, रात 12:02 बजे से 12:49 बजे तक
  • मध्यरात्रि का क्षण: लगभग 12:17 बजे, 5 सितंबर
  • पारण का समय: अगले दिन सूर्योदय के बाद, लगभग सुबह 6:14 बजे; पारण की परंपरा के अनुसार समय अलग हो सकता है।
नोट: पंचांग की गणना और व्रत की परंपरा के अनुसार समय में मामूली अंतर संभव है। विशेष रूप से व्रत पारण के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी मान्य परंपरा का पालन करना उचित है।

जन्माष्टमी पूजा विधि और व्रत के नियम

जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप, यानी लड्डू गोपाल, की विशेष पूजा करते हैं। सामान्य रूप से पूजा की विधि इस प्रकार मानी जाती है:
  • व्रत और संकल्प: सुबह स्नान करके भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करें और अपनी श्रद्धानुसार व्रत का संकल्प लें। व्रत फलाहार या अन्य निर्धारित नियमों के अनुसार रखा जा सकता है।
  • पूजन की तैयारी: शाम से भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारी करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करके सजाएं। लड्डू गोपाल को पालने में विराजित किया जा सकता है।
  • पंचामृत स्नान: मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के समय भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और जल का प्रयोग किया जाता है।
  • शृंगार और भोग: भगवान को नए वस्त्र पहनाएं तथा मोर पंख और बांसुरी आदि अर्पित करें। माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचामृत और अन्य सात्त्विक प्रसाद का भोग लगाया जा सकता है।
  • आरती और व्रत पारण: जन्मोत्सव के बाद भगवान श्री कृष्ण की आरती करें। व्रत पारण का समय अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित करें।

उज्जैन में जन्माष्टमी का विशेष महत्व

उज्जैन (अवंतिका नगरी) भगवान महाकाल की नगरी होने के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित सांदीपनि आश्रम वह पवित्र स्थान माना जाता है जहाँ भगवान श्री कृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। आश्रम में श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा की मूर्तियां भी हैं, जिनके दर्शन श्रद्धालु करते हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण से जुड़े इस पवित्र स्थान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु उज्जैन आते हैं।

जन्माष्टमी पर उज्जैन में कहां करें भगवान कृष्ण के दर्शन?

यदि आप जन्माष्टमी के अवसर पर उज्जैन आ रहे हैं, तो भगवान श्री कृष्ण से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकते हैं:
  • सांदीपनि आश्रम: यह भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की शिक्षा से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां भगवान श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा की मूर्तियों के दर्शन किए जा सकते हैं।
  • ISKCON मंदिर उज्जैन: उज्जैन का ISKCON मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह नानाखेड़ा बस स्टैंड के पास स्थित है।
  • महाकालेश्वर मंदिर: जन्माष्टमी के अवसर पर उज्जैन आने वाले श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन को भी अपनी तीर्थयात्रा में शामिल कर सकते हैं।

उज्जैन यात्रा: जन्माष्टमी पर अन्य दर्शन और पूजा

यदि आप जन्माष्टमी के अवसर पर उज्जैन आ रहे हैं, तो भगवान श्री कृष्ण से जुड़े स्थलों के साथ भगवान महाकाल के दर्शन भी कर सकते हैं। उज्जैन में अनेक प्रकार के वैदिक और धार्मिक अनुष्ठान भी श्रद्धालुओं द्वारा करवाए जाते हैं।
यदि आप अपनी कुंडली से संबंधित किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो कालसर्प दोष पूजा और रुद्राभिषेक जैसी सेवाओं के बारे में हमारे विद्वान पंडितों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जन्माष्टमी 2026 में व्रत का पारण कब करना चाहिए?

उज्जैन के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद लगभग सुबह 6:14 बजे पारण का समय बताया गया है। हालांकि, पारण की परंपरा अलग-अलग संप्रदायों और परिवारों में अलग हो सकती है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी मान्य परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण करना चाहिए।

क्या सांदीपनि आश्रम में भगवान श्री कृष्ण से जुड़े दर्शन किए जा सकते हैं?

जी हाँ। सांदीपनि आश्रम उज्जैन का महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। जिला प्रशासन के अनुसार भगवान श्री कृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी। आश्रम में भगवान श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा की मूर्तियां भी हैं।

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण को कौन सा भोग लगाया जाता है?

जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण को अपनी श्रद्धा के अनुसार माखन-मिश्री, पंजीरी, पंचामृत, फल और अन्य सात्त्विक प्रसाद का भोग लगाया जा सकता है।