August 6, 2026 • By Pandit Ji
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा का महत्व
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष तब होता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सात प्रमुख ग्रह राहु और केतु के बीच फंस जाते हैं। यह ग्रहों की स्थिति करियर में प्रगति, वित्तीय स्थिरता और वैवाहिक सद्भाव में गंभीर रुकावटें पैदा करने के लिए जानी जाती है।
बहुत से लोग आश्चर्य करते हैं कि इस विशिष्ट पूजा के लिए उज्जैन को अंतिम गंतव्य क्यों माना जाता है। इसका उत्तर प्राचीन शास्त्रों में निहित है। उज्जैन महाकाल (भगवान शिव, समय और मृत्यु के विजेता) की नगरी है। चूंकि राहु और केतु अनिवार्य रूप से समय के बीतने से शासित छाया ग्रह हैं, इसलिए भगवान शिव के महाकाल रूप की प्रार्थना करने से उनके अशुभ प्रभाव बेअसर हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, पवित्र क्षिप्रा नदी और रामघाट की उपस्थिति पैतृक और सर्प श्रापों को हल करने के लिए एकदम सही ऊर्जावान वातावरण प्रदान करती है।
उज्जैन में कालसर्प दोष निवारण पूजा करने में विशिष्ट अनुष्ठान शामिल हैं, जिसमें भगवान गणेश, नवग्रह और नाग-नागिन की चांदी की मूर्तियों की पूजा शामिल है। रुद्राभिषेक के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप एक शक्तिशाली आभा बनाता है जो नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर देता है।
यदि आप अपने जीवन में अस्पष्टीकृत देरी का सामना कर रहे हैं, तो संपूर्ण कुंडली विश्लेषण के लिए उज्जैन में एक योग्य पंडित से परामर्श करना और इस पूजा को आयोजित करना आपकी वास्तविक क्षमता को खोलने की कुंजी हो सकता है।

