August 12, 2026 • By Pandit Ji

हरतालिका तीज 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम और उज्जैन में पूजा का महत्व

हरतालिका तीज 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम और उज्जैन में पूजा का महत्व

हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला एक प्रमुख व्रत है, जो भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, हरतालिका तीज का पावन पर्व सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

हरतालिका तीज का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य प्राप्ति के लिए रखा जाता है। अविवाहित कन्याएं भी अच्छे और योग्य वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। मान्यता है कि सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह अत्यंत कठिन व्रत किया था।

हरतालिका तीज व्रत की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं, ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न हो। इसी कथा से ‘हरतालिका’ नाम की व्याख्या की जाती है—‘हरत’ अर्थात हरण और ‘आलिका’ अर्थात सखी।
उसी जंगल में, भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन, माता पार्वती ने रेत (मिट्टी) से शिवलिंग और पार्वती की प्रतिमा बनाई और बिना अन्न-जल ग्रहण किए कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने पार्वती जी को पत्नी रूप में स्वीकार किया।

हरतालिका तीज 2026 पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा क्यों की जाती है?

हरतालिका तीज पर शिव और पार्वती का पूजन विशेष रूप से उनके दांपत्य के धार्मिक महत्व के कारण किया जाता है। माता पार्वती की शिव को पति रूप में पाने की तपस्या इस व्रत का आधार है। विवाहित महिलाएं इसी आदर्श को ध्यान में रखकर सुखी दांपत्य और सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज 2026 का शुभ मुहूर्त — उज्जैन

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर को है। पूजा का शुभ समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। उज्जैन प्राचीन काल से ही भारतीय ज्योतिष और पंचांग परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए यहां पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।

हरतालिका तीज व्रत के नियम

परंपरा में हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है। हालांकि, व्रत की विधि परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है। व्रत के दौरान दिन में सोना वर्जित माना जाता है; महिलाएं रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करती हैं। अगले दिन पूजा और पारण की विधि परिवार तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कई स्थानों पर सुहाग सामग्री अर्पित या दान करने की परंपरा भी है।
महत्वपूर्ण नोट: गर्भवती महिलाओं या अस्वस्थ महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही व्रत का तरीका तय करना चाहिए।

हरतालिका तीज 2026 की पूजा विधि

  1. प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर लाल या हरे रंग के) पहनें।
  2. पूजा स्थान को साफ करके वहां एक लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं।
  3. मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।
  4. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, और सफेद फूल अर्पित करें।
  5. माता पार्वती को सुहाग की सभी सामग्रियां (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी आदि) चढ़ाएं।
  6. हरतालिका तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  7. आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

पूजा सामग्री की पूरी सूची

  • शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा (या चित्र)
  • बेलपत्र, धतूरा, और शमी के पत्ते
  • सफेद और लाल पुष्प
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • दीपक, धूप, और कपूर
  • सिंदूर, मेहंदी, और सुहाग सामग्री (चूड़ियां, बिंदी, आलता)
  • ऋतु फल और नैवेद्य (मिठाई)

शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा क्यों बनाई जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने वन में बालू से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की उपासना की थी। उसी परंपरा का पालन करते हुए, श्रद्धालु आज भी हरतालिका तीज पर अपने हाथों से मिट्टी की प्रतिमा बनाते हैं। यह मिट्टी की प्रतिमा प्रकृति से जुड़ाव और पार्वती जी की कठोर तपस्या के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

हरतालिका तीज में क्या करें और क्या न करें?

क्या करें: पूरा दिन शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करें। रात में जागरण कर भजन गाएं। अगली सुबह सुहाग सामग्री दान करें।
क्या न करें: क्रोध करने या किसी का अपमान करने से बचें। स्वास्थ्य का ध्यान सर्वोपरि रखें।

उज्जैन में हरतालिका तीज पूजा का महत्व

महाकाल की नगरी उज्जैन में शिव-पार्वती उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। यहाँ तीज के अवसर पर श्रद्धालु शिव मंदिरों में दर्शन और विशेष शिव उपासना के लिए जाते हैं।
घर पर पूजा करने का अपना महत्व है, लेकिन उज्जैन में वैदिक परंपरा के अनुसार पंडित जी के मार्गदर्शन में पूजा और संकल्प विधि से संपन्न कराई जा सकती है। उज्जैन भगवान शिव की उपासना और महाकाल परंपरा से विशेष रूप से जुड़ा धार्मिक नगर है।

पंडित जी से विधिवत पूजा कराने की जानकारी

यदि आप हरतालिका तीज के अवसर पर उज्जैन में शिव-पार्वती पूजन या किसी विशेष अनुष्ठान (जैसे रुद्राभिषेक) को वैदिक विधि से संपन्न कराना चाहते हैं, तो हमारे अनुभवी वैदिक पंडितों से संपर्क कर सकते हैं। पूजा की विधि, संकल्प और उपलब्ध सेवाओं के बारे में पंडित जी से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
आप हमारे अन्य लेख यहाँ पढ़ सकते हैं, या विभिन्न पूजा सेवाओं की जानकारी यहाँ प्राप्त कर सकते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज का पावन पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को है।

हरतालिका तीज का व्रत कौन रख सकता है?

यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। अविवाहित कन्याएं भी योग्य वर की प्राप्ति के लिए इसे रख सकती हैं।

क्या हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखना जरूरी है?

परंपरागत रूप से यह निर्जला रखा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति, गर्भावस्था या पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत की विधि में बदलाव किया जा सकता है।

हरतालिका तीज की पूजा में क्या सामग्री चाहिए?

मुख्य रूप से शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, पंचामृत, दीपक, और माता पार्वती के लिए सुहाग की सभी सामग्री चाहिए।

क्या अविवाहित लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने यह व्रत विवाह से पूर्व ही रखा था, इसलिए अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं।

उज्जैन में हरतालिका तीज की पूजा पंडित जी से कैसे कराएं?

आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं। पंडित जी वैदिक परंपरा और संकल्प विधि के माध्यम से आपका अनुष्ठान संपन्न करा सकते हैं।